Tuesday, October 11, 2011

मृत्यु - जीवन का अंत

ग़ज़ल  सम्राट स्वर्गीय श्री जगजीत सिंह जी को समर्पित !!!














जन्म लेता हूँ, और किसी का संसार बन जाता हूँ !
अपार, अनोखा, अतुल्य और असीमित प्यार पाता हूँ !!

मेरी एक मुस्कराहट के लिए, वह क्या क्या रूप बनाते है !
अपना असली रूप छोड़कर, खुद भी बच्चे बन जाते है !!

रातों की नींद, दिन का आराम, तन्मय होकर लुटाते हैं !
बड़ा होकर, नाम रोशन करे, कुछ ऐसी आस जगाते हैं !!
   
सारा यौवन, मस्ती और जिम्मेदारियों का संगम होता है !
पल, वर्ष में बदलते हैं, और जीवन संकुचित होता है  !!

समय गुजरता है, मुठ्ठी से फिसलती रेत की भाँति !
मोह-माया का चक्र भुला देता है, कि जन्म के बाद मृत्यु भी है आती !!

कुछ हाँथ नहीं आता, हर साथ छूट जाता !
मर -मिट  के जो कमाया, कुछ साथ नहीं जाता !!

कुछ यादों के सहारे , एक छाप छोड़ जाऊं !
कर गुजरूँ कुछ में ऐसा, कि हर लम्हा याद आऊं!

हर दिल में, एक कोना, मेरे लिए बना हो !
जीवन हो ख़त्म उस दिन, जिस दिन जगह वहाँ  हो !!

कुछ और नहीं चाहे, यह साँस थमते-थमते !
कर जाऊं  पार मंजिल, पग साथ चलते-चलते !!  पग  साथ  चलते - चलते !!!!!!!!!!!!!!

आपका शिवा
११ -१० - २०११ 

Aapka Shiva

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Mumbai, Maharashtra, India