कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
पलक झपकना भूलकर, नज़र एक टक घूर कर !
ख्यालों के समंदर में डूब जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाय की प्याली देखकर, दुनिया सारी भूल कर !
सोच की लहरें , अतीत की चट्टानों से टकराती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
बादल धरती चूमकर, सावन की बौछार कर !
पहली बारिश की वह बुँदे, एक खुशबू याद दिलाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाँद को मामा मानकर, बचपन अपना याद कर !
गर्मी की वह ठंडी रातें, दिल को मेरे तडपती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
उन तस्वीरों को देख कर, एक पल में सदियाँ पार कर !
हर लम्हा जैसे जिंदा है, बस उम्र वहीं थम जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
हर आती जाती रूह यहाँ, जैसे मुझको फुसलाती है !
तेरे बिन यह घर सूना है, इतना कह चुप रह जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है ...........
आपका शिवा
१४ -मार्च -२०१२
बर्लिन (जर्मनी)
पलक झपकना भूलकर, नज़र एक टक घूर कर !
ख्यालों के समंदर में डूब जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाय की प्याली देखकर, दुनिया सारी भूल कर !
सोच की लहरें , अतीत की चट्टानों से टकराती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
बादल धरती चूमकर, सावन की बौछार कर !
पहली बारिश की वह बुँदे, एक खुशबू याद दिलाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाँद को मामा मानकर, बचपन अपना याद कर !
गर्मी की वह ठंडी रातें, दिल को मेरे तडपती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
उन तस्वीरों को देख कर, एक पल में सदियाँ पार कर !
हर लम्हा जैसे जिंदा है, बस उम्र वहीं थम जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
हर आती जाती रूह यहाँ, जैसे मुझको फुसलाती है !
तेरे बिन यह घर सूना है, इतना कह चुप रह जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है ...........
आपका शिवा
१४ -मार्च -२०१२
बर्लिन (जर्मनी)
