Monday, April 23, 2012

जीवन के मौसम अनजाने से

जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!




कभी आग लगे, कभी धुआं उठे,
              कभी बारिश जमकर टूट पड़े !
हर वक़्त कहीं कुछ घटता है,
               किस रस्ते हम  मजबूर खड़े !
क्यों सारा जग इठलाता है,
                जब स्तर नभ की ओर बड़े !
कब किस क्षण कैसी विपदा हो,
                 राजा या रंक ना फर्क पड़े !



जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!

कभी बिजली बन टूटे सर पर, कभी रोशन घर बन दीप करे !
कभी दो रोटी मिलना मुश्किल, कभी छप्पन भोग के स्वाद चखे ! 
छाया जिस पर पड़ जाये वह, साडे साती की भेंट चढ़े!
कभी तेल में भजिया तलते थे, अब लेकर शीशी द्वार खड़े !! 

जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!

नादान बड़ा वह बचपन था, हँस, बोल, सभी से खेल लिए !
स्वार्थ,  कपट  और लालच को, है यौवन अपने साथ लिए !
जब ह्रदय गति रुक जाएगी, है जाना सबकुछ छोड़ यहाँ !
बंधन जोड़ा जिन फूलों ने, जीवन का करें वह अंत बयाँ !

जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!

आपका शिवा 
बर्लिन,  जर्मनी
 २३- अप्रेल-२०१२ 

Thursday, March 15, 2012

कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!

कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!










पलक झपकना भूलकर, नज़र एक टक घूर कर !
ख्यालों के समंदर में डूब जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

चाय की प्याली देखकर, दुनिया सारी भूल कर !
सोच की लहरें , अतीत की चट्टानों से टकराती  है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

बादल धरती चूमकर, सावन की बौछार कर !
पहली बारिश की वह बुँदे, एक खुशबू याद दिलाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

चाँद को मामा मानकर, बचपन अपना याद कर !
गर्मी की वह ठंडी रातें, दिल को मेरे तडपती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!


उन तस्वीरों को देख कर, एक पल में सदियाँ पार कर !
हर लम्हा जैसे जिंदा है, बस उम्र वहीं थम जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

हर आती जाती रूह यहाँ, जैसे मुझको फुसलाती है !
तेरे बिन यह घर सूना है, इतना कह चुप रह जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  ...........


आपका शिवा
१४ -मार्च -२०१२
बर्लिन (जर्मनी)

Aapka Shiva

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