Monday, November 14, 2016

जय श्री राम

श्री राम, श्री राम।
युगों युगों से चलता आया,
हृदयों में ही यही समाया,
सब की पीड़ा हर लेता है,
हर मन पुलकित कर देता है,
माला का हर मनका बोले,
मन में मीठी मिश्री घोले,
सहज सरल यह नाम।
श्री राम, श्री राम।।

श्री राम, श्री राम,
मर्यादा पुरुषोत्तम तुम ही,
शबरी के भवतारण तुम ही,
पवनपुत्र ने चीर दिखाया,
रोम रोम में तुमको पाया,
दो अक्षर में जीवन सारा,
आदि से लेकर अंत संवारा,
तेरी महिमा, अद्भुत सबसे,
जीवन का हर अनुभव तुमसे,
शिव शंकर भी तुम पर रीझे,
तीनो लोक तुम्ही को पूजें,
जनकसुता को वर ऐसों, जैसे राधा को घनश्याम।
श्री राम, श्री राम।।


आओ ना जाओ ये कहकर,कहाँ हो!!!

आओ ना जाओ ये कहकर , कहाँ  हो !!!!


आओ ना जाओ ये कहकर , कहाँ  हो!
रहते हैं हम तेरे दिल में हमेशा !
ना ढूंढो मुझे यूँ , कि मैं बिखरा मोती !
साँसों में तेरी , पिरोया हूँ मैं !!

हमेशा -हमेशा  तेरे पास हूँ मैं !
तेरे बिन सुबह शाम, होती नहीं है !
ख़ुशी है चहकती , कन्धों पे मेरे !
घरोंदा तेरा मेरे दिल में बना है !!

ये सदियाँ , ये मौसम , गुजरते रहेंगे !
रहेगा हमेशा यादों का खुमार !
ये गलियाँ , ये रस्ते , सिकुड़ते रहेंगे !
रहेगा हमेशा ये बरगद का झाड़ !

हर पत्ते पे तुझको , उतारा निग़ाहों से !
ये कैसी क़शिश, ये कैसा मेरा प्यार !!!!


आपका शिवा
लंदन - १४ -नवम्बर -२०१६

Aapka Shiva

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