ग़ज़ल सम्राट स्वर्गीय श्री जगजीत सिंह जी को समर्पित !!!

जन्म लेता हूँ, और किसी का संसार बन जाता हूँ !
अपार, अनोखा, अतुल्य और असीमित प्यार पाता हूँ !!
मेरी एक मुस्कराहट के लिए, वह क्या क्या रूप बनाते है !
अपना असली रूप छोड़कर, खुद भी बच्चे बन जाते है !!
रातों की नींद, दिन का आराम, तन्मय होकर लुटाते हैं !
बड़ा होकर, नाम रोशन करे, कुछ ऐसी आस जगाते हैं !!
सारा यौवन, मस्ती और जिम्मेदारियों का संगम होता है !
पल, वर्ष में बदलते हैं, और जीवन संकुचित होता है !!
समय गुजरता है, मुठ्ठी से फिसलती रेत की भाँति !
मोह-माया का चक्र भुला देता है, कि जन्म के बाद मृत्यु भी है आती !!
कुछ हाँथ नहीं आता, हर साथ छूट जाता !
मर -मिट के जो कमाया, कुछ साथ नहीं जाता !!
कुछ यादों के सहारे , एक छाप छोड़ जाऊं !
कर गुजरूँ कुछ में ऐसा, कि हर लम्हा याद आऊं!
हर दिल में, एक कोना, मेरे लिए बना हो !
जीवन हो ख़त्म उस दिन, जिस दिन जगह वहाँ हो !!
कुछ और नहीं चाहे, यह साँस थमते-थमते !
कर जाऊं पार मंजिल, पग साथ चलते-चलते !! पग साथ चलते - चलते !!!!!!!!!!!!!!
आपका शिवा
११ -१० - २०११




