दोस्तो एक बात याद आ गई , कल सुबह-सुबह वह मेरे पास आ गई !
बोली जाओ बाज़ार से , मलाई बर्फी ले आओ !
हमने भी कह दिया,आज करवाचौथ है , हमसे न मंगवाओ !
मलाई बर्फी देखकर तुम्हारा मन डोल जायेगा !
घंटों का उपवास , कुछ मिनटों में टूट जायेगा !
वह मुस्कराते हुए बोली , आप न जाने मुझे कब समझोगे !
हँसते हँसते ही सही , मेरा एक काम करोगे !
जाके किचन में अपने लिए , खाना परोस लो !
तुम्हारे पसंदीदा , कड़ी-चावल से रु-ब-रु हो लो !
और मेरा मन जब कड़ी -चावल से नहीं डोला !
तो क्या मलाई बर्फी और क्या बर्फ का गोला !
ये करवाचौथ का व्रत मैंने तुम्हारे लिए रखा है !
खाना तो दूर , पानी भी न पीने का इरादा पक्का है !
तुम बस मुझसे एक वादा करोगे !
यूँ ही हर जनम बस मेरे बन के रहोगे !
यह सुनकर , मेरी भावनाएं जैसे हिल गई !
अपनी हथेली मेरी हथेली में रखकर , तुम यह क्या कह गई !
मैंने तो कभी अगले जनम के बारे मैं सोचा ही नहीं है !
यह सिर्फ एक औरत का दिल कर सकता है , जिसमे कोई छल कोई धोका नहीं है !
मुझे भी शायद अपने दिल को थोड़ा समझाना होगा !
इस जनम ही नहीं हर जनम साथ निभाना होगा !
बेटी , पत्नी , माँ -हर रूप में तुझे प्रणाम करता हूँ !
और अपनी ये चार पंक्तिया , आपके नाम करता हूँ !!!!!!!
आपका शिवा ,
लन्दन २२-अक्टूबर -२०१६ १३ :००
बोली जाओ बाज़ार से , मलाई बर्फी ले आओ !
हमने भी कह दिया,आज करवाचौथ है , हमसे न मंगवाओ !
मलाई बर्फी देखकर तुम्हारा मन डोल जायेगा !
घंटों का उपवास , कुछ मिनटों में टूट जायेगा !
वह मुस्कराते हुए बोली , आप न जाने मुझे कब समझोगे !
हँसते हँसते ही सही , मेरा एक काम करोगे !
जाके किचन में अपने लिए , खाना परोस लो !
तुम्हारे पसंदीदा , कड़ी-चावल से रु-ब-रु हो लो !
और मेरा मन जब कड़ी -चावल से नहीं डोला !
तो क्या मलाई बर्फी और क्या बर्फ का गोला !
ये करवाचौथ का व्रत मैंने तुम्हारे लिए रखा है !
खाना तो दूर , पानी भी न पीने का इरादा पक्का है !
तुम बस मुझसे एक वादा करोगे !
यूँ ही हर जनम बस मेरे बन के रहोगे !
यह सुनकर , मेरी भावनाएं जैसे हिल गई !
अपनी हथेली मेरी हथेली में रखकर , तुम यह क्या कह गई !
मैंने तो कभी अगले जनम के बारे मैं सोचा ही नहीं है !
यह सिर्फ एक औरत का दिल कर सकता है , जिसमे कोई छल कोई धोका नहीं है !
मुझे भी शायद अपने दिल को थोड़ा समझाना होगा !
इस जनम ही नहीं हर जनम साथ निभाना होगा !
बेटी , पत्नी , माँ -हर रूप में तुझे प्रणाम करता हूँ !
और अपनी ये चार पंक्तिया , आपके नाम करता हूँ !!!!!!!
आपका शिवा ,
लन्दन २२-अक्टूबर -२०१६ १३ :००
