Thursday, March 15, 2012

कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!

कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!










पलक झपकना भूलकर, नज़र एक टक घूर कर !
ख्यालों के समंदर में डूब जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

चाय की प्याली देखकर, दुनिया सारी भूल कर !
सोच की लहरें , अतीत की चट्टानों से टकराती  है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

बादल धरती चूमकर, सावन की बौछार कर !
पहली बारिश की वह बुँदे, एक खुशबू याद दिलाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

चाँद को मामा मानकर, बचपन अपना याद कर !
गर्मी की वह ठंडी रातें, दिल को मेरे तडपती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!


उन तस्वीरों को देख कर, एक पल में सदियाँ पार कर !
हर लम्हा जैसे जिंदा है, बस उम्र वहीं थम जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

हर आती जाती रूह यहाँ, जैसे मुझको फुसलाती है !
तेरे बिन यह घर सूना है, इतना कह चुप रह जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  !!

कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है  ...........


आपका शिवा
१४ -मार्च -२०१२
बर्लिन (जर्मनी)

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Aapka Shiva

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