मुझे खुद से दूर कर दे, तेरी हर प्यारी मुस्कान ।
लम्हे थम के सिमटे, जैसे माँगे वह मुकाम ॥
मैं हर उस एक पल को, कुछ नई पहचान दूँगा ।
इसे तोहफ़ा समझो मेरा, उन्हें ख़ास नाम दूँगा॥
वक़्त रोक नहीं सकते, पर इसे कैद किया मैंने ।
"लहरों पर प्यारा बचपन" इसे नाम दिया मैंने ॥
ज़िद ठानी ऐसी तुमने, लहरों पे तुमको चलना ।
रोको ना कोई टोको, मुझको नहीं पकड़ना ॥
पहले तो लड़खड़ाई, फिर लहरें मुस्कराईं ।
धीरे से बहते-बहते ,तेरे करीब आईं ॥
तेरी भाषा हम न समझे, इनमे न शब्द कोई ।
मासूम हुई हवा भी, जो लोरी सुन के सोई॥
तेरी वह ख़ुशी थी अद्भुत, ना था कोई ठिकाना।
मेरी जान बसती तुममें, तू मेरी प्यारी शाना ॥
तेरा मुस्कराता चेहरा, एहसास यह दिलाता ।
मैं जी रहा हूँ फिर से, वही बचपन "जो बार बार याद आता " ॥॥
आपका शिवा
लन्दन , २६-फ़रवरी-२०१७ ०० :४८
लम्हे थम के सिमटे, जैसे माँगे वह मुकाम ॥
मैं हर उस एक पल को, कुछ नई पहचान दूँगा ।
इसे तोहफ़ा समझो मेरा, उन्हें ख़ास नाम दूँगा॥
वक़्त रोक नहीं सकते, पर इसे कैद किया मैंने ।
"लहरों पर प्यारा बचपन" इसे नाम दिया मैंने ॥
ज़िद ठानी ऐसी तुमने, लहरों पे तुमको चलना ।
रोको ना कोई टोको, मुझको नहीं पकड़ना ॥
पहले तो लड़खड़ाई, फिर लहरें मुस्कराईं ।
धीरे से बहते-बहते ,तेरे करीब आईं ॥
तेरी भाषा हम न समझे, इनमे न शब्द कोई ।
मासूम हुई हवा भी, जो लोरी सुन के सोई॥
तेरी वह ख़ुशी थी अद्भुत, ना था कोई ठिकाना।
मेरी जान बसती तुममें, तू मेरी प्यारी शाना ॥
तेरा मुस्कराता चेहरा, एहसास यह दिलाता ।
मैं जी रहा हूँ फिर से, वही बचपन "जो बार बार याद आता " ॥॥
आपका शिवा
लन्दन , २६-फ़रवरी-२०१७ ०० :४८
