Sunday, February 26, 2017

लहरों पर प्यारा बचपन

मुझे खुद से दूर कर दे, तेरी हर प्यारी मुस्कान ।
लम्हे थम के सिमटे, जैसे माँगे वह मुकाम ॥

मैं हर उस एक पल को, कुछ नई पहचान दूँगा ।
इसे तोहफ़ा समझो मेरा, उन्हें  ख़ास नाम दूँगा॥

वक़्त रोक नहीं सकते, पर इसे कैद किया मैंने ।
"लहरों  पर प्यारा बचपन" इसे नाम दिया मैंने ॥

ज़िद ठानी ऐसी तुमने, लहरों पे तुमको चलना ।
रोको ना कोई टोको, मुझको नहीं पकड़ना ॥ 

पहले तो लड़खड़ाई, फिर लहरें मुस्कराईं  ।
धीरे से बहते-बहते ,तेरे करीब आईं  ॥ 

तेरी भाषा हम न समझे, इनमे न शब्द कोई ।
मासूम हुई हवा भी, जो लोरी सुन के सोई॥


तेरी वह ख़ुशी  थी अद्भुत, ना था कोई ठिकाना।
मेरी जान बसती तुममें, तू मेरी प्यारी शाना ॥

तेरा मुस्कराता चेहरा, एहसास यह दिलाता ।
मैं जी रहा हूँ फिर से, वही बचपन "जो  बार बार याद आता " ॥॥







आपका शिवा
लन्दन , २६-फ़रवरी-२०१७ ०० :४८

Aapka Shiva

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