श्री राम, श्री राम।
युगों युगों से चलता आया,
हृदयों में ही यही समाया,
सब की पीड़ा हर लेता है,
हर मन पुलकित कर देता है,
माला का हर मनका बोले,
मन में मीठी मिश्री घोले,
सहज सरल यह नाम।
श्री राम, श्री राम।।
श्री राम, श्री राम,
मर्यादा पुरुषोत्तम तुम ही,
शबरी के भवतारण तुम ही,
पवनपुत्र ने चीर दिखाया,
रोम रोम में तुमको पाया,
दो अक्षर में जीवन सारा,
आदि से लेकर अंत संवारा,
तेरी महिमा, अद्भुत सबसे,
जीवन का हर अनुभव तुमसे,
शिव शंकर भी तुम पर रीझे,
तीनो लोक तुम्ही को पूजें,
जनकसुता को वर ऐसों, जैसे राधा को घनश्याम।
श्री राम, श्री राम।।
Very nice as always:)
ReplyDeleteBahut Sundar🙂 Jai Shree Ram.. 🙏
ReplyDelete������
ReplyDeleteVery nice Shivaji!! !!
ReplyDeleteNice.... Jai shri Ram
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