Saturday, August 13, 2016
Saturday, August 15, 2015
काश मैं उस वक़्त होता !!!!!!!
काश मैं उस वक़्त होता !!!!!!!
देखकर अनोखे बलिदान, मुझे भी जोश आया होता !
मैंने भी दो चार अंग्रेजों को, मार गिराया होता!!
देश की आज़ादी मैं, कुछ हिस्सा मेरा भी होता !
मेरे नाम के आगे भी, स्वतंत्रता सेनानी जुड़ होता!!
काश मैं उस वक़्त होता !!!!!!!
चलो कोई नहीं , हमे आज़ादी तो बिना मांगे मिल गयी !
बुजुर्गों की मेहनत , हमारे लिए काम कर गयी !!
अब देखते हैं हूँ अपने देश के लिए क्या कर पाते हैं!
कम से कम "Neat & Clean" भारत का सपना , अपने आगे आने वाली पीढ़ियों को दिखाते हैं !!!!!
जय हिंद ! जय भारत !!!!!
स्वतंत्रता दिवस २०१५
आपका शिवा
देखकर अनोखे बलिदान, मुझे भी जोश आया होता !
मैंने भी दो चार अंग्रेजों को, मार गिराया होता!!
देश की आज़ादी मैं, कुछ हिस्सा मेरा भी होता !
मेरे नाम के आगे भी, स्वतंत्रता सेनानी जुड़ होता!!
काश मैं उस वक़्त होता !!!!!!!
चलो कोई नहीं , हमे आज़ादी तो बिना मांगे मिल गयी !
बुजुर्गों की मेहनत , हमारे लिए काम कर गयी !!
अब देखते हैं हूँ अपने देश के लिए क्या कर पाते हैं!
कम से कम "Neat & Clean" भारत का सपना , अपने आगे आने वाली पीढ़ियों को दिखाते हैं !!!!!
जय हिंद ! जय भारत !!!!!
स्वतंत्रता दिवस २०१५
आपका शिवा
Monday, April 23, 2012
जीवन के मौसम अनजाने से
जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!
कभी आग लगे, कभी धुआं उठे,
कभी बारिश जमकर टूट पड़े !
हर वक़्त कहीं कुछ घटता है,किस रस्ते हम मजबूर खड़े !
क्यों सारा जग इठलाता है,
जब स्तर नभ की ओर बड़े !
कब किस क्षण कैसी विपदा हो,
राजा या रंक ना फर्क पड़े !
जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!
कभी बिजली बन टूटे सर पर, कभी रोशन घर बन दीप करे !
कभी दो रोटी मिलना मुश्किल, कभी छप्पन भोग के स्वाद चखे !
छाया जिस पर पड़ जाये वह, साडे साती की भेंट चढ़े!
कभी तेल में भजिया तलते थे, अब लेकर शीशी द्वार खड़े !!
जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!
नादान बड़ा वह बचपन था, हँस, बोल, सभी से खेल लिए !
स्वार्थ, कपट और लालच को, है यौवन अपने साथ लिए !
जब ह्रदय गति रुक जाएगी, है जाना सबकुछ छोड़ यहाँ !
बंधन जोड़ा जिन फूलों ने, जीवन का करें वह अंत बयाँ !
जीवन के मौसम अनजाने से, पर रिश्ता इनसे गहरा है !!
ना कहा-सुनी इससे करना, यह तो बचपन से बहरा है !!
आपका शिवा
बर्लिन, जर्मनी
२३- अप्रेल-२०१२
Thursday, March 15, 2012
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
पलक झपकना भूलकर, नज़र एक टक घूर कर !
ख्यालों के समंदर में डूब जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाय की प्याली देखकर, दुनिया सारी भूल कर !
सोच की लहरें , अतीत की चट्टानों से टकराती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
बादल धरती चूमकर, सावन की बौछार कर !
पहली बारिश की वह बुँदे, एक खुशबू याद दिलाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाँद को मामा मानकर, बचपन अपना याद कर !
गर्मी की वह ठंडी रातें, दिल को मेरे तडपती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
उन तस्वीरों को देख कर, एक पल में सदियाँ पार कर !
हर लम्हा जैसे जिंदा है, बस उम्र वहीं थम जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
हर आती जाती रूह यहाँ, जैसे मुझको फुसलाती है !
तेरे बिन यह घर सूना है, इतना कह चुप रह जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है ...........
आपका शिवा
१४ -मार्च -२०१२
बर्लिन (जर्मनी)
पलक झपकना भूलकर, नज़र एक टक घूर कर !
ख्यालों के समंदर में डूब जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाय की प्याली देखकर, दुनिया सारी भूल कर !
सोच की लहरें , अतीत की चट्टानों से टकराती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
बादल धरती चूमकर, सावन की बौछार कर !
पहली बारिश की वह बुँदे, एक खुशबू याद दिलाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
चाँद को मामा मानकर, बचपन अपना याद कर !
गर्मी की वह ठंडी रातें, दिल को मेरे तडपती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
उन तस्वीरों को देख कर, एक पल में सदियाँ पार कर !
हर लम्हा जैसे जिंदा है, बस उम्र वहीं थम जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
हर आती जाती रूह यहाँ, जैसे मुझको फुसलाती है !
तेरे बिन यह घर सूना है, इतना कह चुप रह जाती है !
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है !!
कभी-कभी अचानक घर की बहुत याद आती है ...........
आपका शिवा
१४ -मार्च -२०१२
बर्लिन (जर्मनी)
Tuesday, October 11, 2011
मृत्यु - जीवन का अंत
ग़ज़ल सम्राट स्वर्गीय श्री जगजीत सिंह जी को समर्पित !!!

जन्म लेता हूँ, और किसी का संसार बन जाता हूँ !
अपार, अनोखा, अतुल्य और असीमित प्यार पाता हूँ !!
मेरी एक मुस्कराहट के लिए, वह क्या क्या रूप बनाते है !
अपना असली रूप छोड़कर, खुद भी बच्चे बन जाते है !!
रातों की नींद, दिन का आराम, तन्मय होकर लुटाते हैं !
बड़ा होकर, नाम रोशन करे, कुछ ऐसी आस जगाते हैं !!
सारा यौवन, मस्ती और जिम्मेदारियों का संगम होता है !
पल, वर्ष में बदलते हैं, और जीवन संकुचित होता है !!
समय गुजरता है, मुठ्ठी से फिसलती रेत की भाँति !
मोह-माया का चक्र भुला देता है, कि जन्म के बाद मृत्यु भी है आती !!
कुछ हाँथ नहीं आता, हर साथ छूट जाता !
मर -मिट के जो कमाया, कुछ साथ नहीं जाता !!
कुछ यादों के सहारे , एक छाप छोड़ जाऊं !
कर गुजरूँ कुछ में ऐसा, कि हर लम्हा याद आऊं!
हर दिल में, एक कोना, मेरे लिए बना हो !
जीवन हो ख़त्म उस दिन, जिस दिन जगह वहाँ हो !!
कुछ और नहीं चाहे, यह साँस थमते-थमते !
कर जाऊं पार मंजिल, पग साथ चलते-चलते !! पग साथ चलते - चलते !!!!!!!!!!!!!!
आपका शिवा
११ -१० - २०११
Monday, August 22, 2011
वन्दे मातरम् !!!!!
क्रांति की एक नई लहर दौड़ी है, ना जाने कितने ताज़ बहा ले जाएगी !
भ्रष्ट चाहे किसी भी छत्र-छाया में छुप लें, अन्ना की हुँकार उन तक पहुच ही जाएगी !!
जन-जन का साथ आत्मविश्वास का उबाल मार रहा है !
एक दिन हो भ्रष्टाचार मुक्त भारत, वो वक़्त अब करीब आ रहा है !
नेताओं की संसद हमारे इरादों के आगे टिक नहीं पायेगी !
और रहा ग़र यही रवैया, तो सरकार बहुत जल्दी मुह की खाएगी!!
संभल जाओ ओ सल्तनत चलाने वालो, वरना ये सल्तनत 125 करोड़ हिस्सों में बटी हुई नज़र आएगी !
कुछ दिन थोडा मौज और करलो तुम, वह दिन दूर नहीं जब ये झूठी शान सर पटक-पटक कर मर जाएगी, सर पटक-पटक कर मर जाएगी !!!!

वन्दे मातरम् !!!!!
आपका शिवा
२० - अगस्त - २०११
कटनी, रेलवे स्टेशन वेटिंग रूम.
Thursday, June 30, 2011
दोस्तों आज मौका है !!!!!!
दोस्तों आज मौका है .....
दोस्तों आज मौका है, इज़हार कर ही देता हूँ !
दिल की गहराइयों में छुपी, वो हर बात बयां कर ही देता हूँ !!
ना जाने कब से मचल रही हैं धड़कने, प्यास बढती जा रही है !
ऐ चाँद थोड़ी चांदनी और बिखेर, वो तस्वीर से बाहर आ रही है !!
उसके रूप का वर्णन, शब्दों में समा नहीं पायेगा !मौजूदगी में उसकी, यहाँ का हर फूल मुस्कराएगा !!
सपनों में मेरे मुझको, हर लम्हा है सताता !
ग़र टूटने से पहले, हकीकत में बदल जाता !!
उठ जागकर में बैठा, आँखों को मिलमिलाता !
सपना था या हकीकत, पर कौन ये बताता !!
दिन आज फिर से आया, वो सामने है मेरे !
कहीं दूर लेके जाऊ, कभी फिर ना हो सबेरे !!
बस देखते ही तुझको, ये मन गुनगुनाया !
कुछ और पास आई, ना खुद को रोक पाया !!
सब खोल के बिखेरा, हर राज़ अपने दिल का !
जब नींद फिर से टूटी, वो फूल थी कमल का !!
बिस्तर पे जिसको मैंने, तकिये से था दबाया !
गुस्ताख़, बनके दिलबर, सपने में मेरे आया !!
जब दास्ताँ ये मैंने, किसी और को सुनाई !
कहीं दूर से किसी ने, आवाज़ ये लगाई !!
तू नादान है रे पगले, क्यों ख़्वाब देखता है !
जब सच्ची है मोह्हबत, क्यों मौका दुन्द्ता हैं !!
इज़हार जाके कर दे, इस बार है हकीकत !
पछतायेगा नहीं तो, आगे है तेरी किस्मत !!
क्यों इतना सोचता है, कुदरत का ये तोहफा है !
मिल जाएगी वह तुझको, ये आखिरी मौका है !!
हिम्मत कहीं से आई, जुबां ना लड़खड़ाई !
कुछ दूर से वो चलके, मेरे करीब आई !!
मेरा नसीब, उसने मुझको गले लगाया !
हर ख़्वाब मेरा सच था, उसने मुझे जताया !!
मेरी जिंदगी का हर दिन, तुझपे हो आके पूरा !
तेरा साथ है तो सच्चा, हर दिन नया सवेरा !!!!!!!!!!!!!!!!!
आपका शिवा
३०-जून-२०११
Tuesday, May 24, 2011
पिता
पिता को समर्पित :-
अनेक अवसरों पर "माँ" के लिए मनोभावों को "मेरी पंक्तियाँ" में व्यक्त किया| आज संकोच छोड़कर, भावनाओ को सशक्त कर कुछ शब्द "पिता" के लिए समर्पित करता हूँ ..
सिर पर हाँथ पिता का होता है, तो बलवान बड़ा मन होता है !
हर सोच मैं उनकी हम ही हैं, संतान ही सब कुछ होता है !
हासिल हो ज़माने की खुशियाँ, निस्वार्थ मनोरथ होता है !!
कटुता भी अगर मुह में है तो, वह दिल बड़ा निर्मल होता है !
हर मार में उनकी, शिक्षा है, सच्चा अपनापन होता है !!
परमेश्वर से, पहले तुम हो , अस्तित्व का तुम ही हो आधार !
आत्मा की अमर चेतना से, करता हूँ नमन में बारम्बार !!
आपका शिवा
२४ - मई - २०११
अनेक अवसरों पर "माँ" के लिए मनोभावों को "मेरी पंक्तियाँ" में व्यक्त किया| आज संकोच छोड़कर, भावनाओ को सशक्त कर कुछ शब्द "पिता" के लिए समर्पित करता हूँ ..
सिर पर हाँथ पिता का होता है, तो बलवान बड़ा मन होता है !
निश्चिन्त, फ़िक्र का नाम नहीं, हर पल यही आलम होता है !!
हर सोच मैं उनकी हम ही हैं, संतान ही सब कुछ होता है !
हासिल हो ज़माने की खुशियाँ, निस्वार्थ मनोरथ होता है !!
कटुता भी अगर मुह में है तो, वह दिल बड़ा निर्मल होता है !
हर मार में उनकी, शिक्षा है, सच्चा अपनापन होता है !!
ऊँगली को पकड़ चलना सीखा, संस्कार विरासत में पाये !
सच्चा, समर्थ, शिक्षित बनकर, हर दिशा में परचम लहराए !!
परमेश्वर से, पहले तुम हो , अस्तित्व का तुम ही हो आधार !
आत्मा की अमर चेतना से, करता हूँ नमन में बारम्बार !!
आपका शिवा
२४ - मई - २०११
Saturday, May 14, 2011
Mother's Day 2011
भाषा की शुरुआत , मुख से निकला पहला शब्द ,
हर दिल में सबसे गहरा जाके बसता है !
यह वही जन्मदात्री , जननी , माता है हमारी ,
जिसके मातृत्व मे जीवन हमारा सँवरता है !
जनम से मर्त्यु तक सबसे प्यारा यही शब्द होता है ,
जो हर किसी के मुख से भावना बनकर प्रकट होता है !
जीवन दायिनी को सर्वस्व समर्पित है , हे माँ तुझे प्रणाम करता हूँ ,
Mother's day के बहाने ही सही, यह चार पंक्तिया "माँ " के नाम करता हूँ !!
आपका शिवा
१४- मई - २०११
Sunday, April 3, 2011
CRICKET WORLD CUP 2011
कुछ पलों के लिए धड़कने जैसे थम गयी,
जीत की आस विकेटों के साथ ढह गयी !
फिर सिलसिला शुरू हुआ प्राथनाओं और मन्त्रों का,
आशाओं और विश्वास के साथ गंभीर के संभलने का !
धोनी ने भी खूब दिखाया अपना दम,
मारा छक्का और जीत गए हम !
सचिन तो पहले ही क्रिकेट के हैं भगवान् ,
युवराज ने आखिर पा ही लिया अपना मुकाम !
और आखिर हासिल किया हमने अपना सपना ,
Finally-finally WORLD CUP 2011 हुआ अपना !!!
Many Thanks Team INDIA!!!!!! :-)
Friday, March 11, 2011
उजाला बनकर आई हो ...
उजाला बनकर आई हो, चाँदनी बनके रहना !
रखना दिल को सँभाल के मेरे, जैसे हाँथों में कंगना !
मिल के तुमसे भुला दूंगा खुदको , हो जाउगा तेरा अपना !!
उजाला बनकर आई हो , चाँदनी बनके रहना .....
साँसे बनकर आई हो, धड़कन बनके रहना !
दिल को चुरा लें, चुरा लें जो मन को , ऐसी बातें करना !
बस जाउगा में आँखों में तेरी, बन जाउगा तेरा सपना !!
उजाला बनकर आई हो , चाँदनी बनके रहना .....
आपका शिवा
१०-मार्च -२०११
Wednesday, October 27, 2010
कौन बनेगा करोड़पति !!!
KBC वाह क्या खेल बनाया है , जो जन्मा नहीं धनवान उसे भी करोड़पति बनाया है !
हमारे सहारे के लिए , इसे लाईफ लाइन से सजाया है !!
रही किस्मत तो हॉट सीट पर पहुच जाओगे , बहुतों ने इसे आजमाया है !
हारने को तो कुछ है नहीं, जीते तो जीते नहीं तो सब सांसारिक माया है !!!!
आपका शिवा
हमारे सहारे के लिए , इसे लाईफ लाइन से सजाया है !!
रही किस्मत तो हॉट सीट पर पहुच जाओगे , बहुतों ने इसे आजमाया है !
हारने को तो कुछ है नहीं, जीते तो जीते नहीं तो सब सांसारिक माया है !!!!
आपका शिवा
Sunday, May 9, 2010
माँ तुझे प्रणाम !!!!
माँ को समर्पित :-
माँ के प्यार में वो अहसास होता है,
कि हर लम्हा उसकी गोद मे ख़ास होता है!
किसी भी दर्द कि कराह माँ की याद दिलाती है,
हाँथ हो सिर पर तो हर मुश्किल आंसा नज़र आती है!
नहीं सोने देती भूखे, हर लम्हा उसे चिंता सताती है,
हे जीवनदायिनी, अस्तित्व है तुझसे, तू जननी हमारी है !!
आपका शिवा
०९- मई-२०१०
माँ के प्यार में वो अहसास होता है,
कि हर लम्हा उसकी गोद मे ख़ास होता है!
किसी भी दर्द कि कराह माँ की याद दिलाती है,
हाँथ हो सिर पर तो हर मुश्किल आंसा नज़र आती है!
नहीं सोने देती भूखे, हर लम्हा उसे चिंता सताती है,
हे जीवनदायिनी, अस्तित्व है तुझसे, तू जननी हमारी है !!
आपका शिवा
०९- मई-२०१०
Saturday, March 27, 2010
Life Vs Age
Dedicated to all dear Readers,
उम्र का पड़ाव कब ठहर जाये, कोई जान ना पाया है !
जीवन के दिन गिनना, जीवन देने वालों ने सिखलाया है !
नष्ट ना करो इसे व्यर्थ मैं, इन पंक्तियों मैं यही समझाया है !
बीते हुए पलों को, चाहकर भी ना कोई वापिस पाया है !
जीलो हर लम्हा मुस्करा कर, बाकि सब तो सांसारिक माया है !!
आपका शिवा
२७/३/२०१०
उम्र का पड़ाव कब ठहर जाये, कोई जान ना पाया है !
जीवन के दिन गिनना, जीवन देने वालों ने सिखलाया है !
नष्ट ना करो इसे व्यर्थ मैं, इन पंक्तियों मैं यही समझाया है !
बीते हुए पलों को, चाहकर भी ना कोई वापिस पाया है !
जीलो हर लम्हा मुस्करा कर, बाकि सब तो सांसारिक माया है !!
आपका शिवा
२७/३/२०१०
Wednesday, March 24, 2010
दिल की चाह
नहीं चाहिए ज़माने की दौलत ,
ना ही महलो की छाया !
अपनों का प्यार याहे बरक़रार,
मेरे दिल को बस यही है भाया !!
आपका शिवा
ना ही महलो की छाया !
अपनों का प्यार याहे बरक़रार,
मेरे दिल को बस यही है भाया !!
आपका शिवा
सुन्दरता !!!
तेरी सुन्दरता जैसे ताजमहल, तेरी नाजुकता जैसे शीशमहल !
तेरी कोमलता जैसे फूल कमल, तेरी मुस्कान जैसे कल-कल कल-कल !!
तेरी ज़ुल्फ़ फिजा मैं बहार, तेरी नज़र तीरे तलवार !
तेरी खनक पायल की झंकार, तू दुआ कर दे तो बेडा पार !!
ओ जाने-जाना न समझो दीवाना, नाम है शिवा आशिक मस्ताना !!
मुझको जो ठुकराएगी, तू बहुत पछताएगी !
याद रखना तो दूर भूल ही न पायेगी !
तो राम करे ऐसा हो जाये, तू coke मैं bottle और वो ढक्कन हो जाये !!
आपका शिवा
१४/१२/२००२
तेरी कोमलता जैसे फूल कमल, तेरी मुस्कान जैसे कल-कल कल-कल !!
तेरी ज़ुल्फ़ फिजा मैं बहार, तेरी नज़र तीरे तलवार !
तेरी खनक पायल की झंकार, तू दुआ कर दे तो बेडा पार !!
तेरा शरमाना चाँद का चुप जाना, तेरा रूठना फूल मुरझाना !
तेरा हँसना दिल बहलाना, तेरी hobby मुझको रुलाना !ओ जाने-जाना न समझो दीवाना, नाम है शिवा आशिक मस्ताना !!
मुझको जो ठुकराएगी, तू बहुत पछताएगी !
याद रखना तो दूर भूल ही न पायेगी !
तो राम करे ऐसा हो जाये, तू coke मैं bottle और वो ढक्कन हो जाये !!
आपका शिवा
१४/१२/२००२
The Theme of Successful Life
शुरुआत हुई है जीवन की, मानव तन मैं प्राण बनकर !
नष्ट न होने दूंगा धडकनों को , केवल ह्रदय की चाह बनकर !
फ़र्ज़ निभाना है उस दूध का, जो रगों मैं बह रहा है खून बनकर !
जीवन की सच्चाई को समझुगा, स्वयं एक सच्चाई बनकर !
अपने हर कर्तव्य का पालन करूँ, कर्त्व्यनिष्ट बनकर !
भटके हुए को मार्ग दिखाऊ, सच्चा मार्गदर्शक बनकर !
हे ईश्वर ब्रम्हांड रचेता, रूप दिखा दे दयालु बनकर !
तन-मन मेरा विस्मय होगा, महकेगा गुलजार ये बनकर !!
आपका शिवा
२१/०१/२००६
नष्ट न होने दूंगा धडकनों को , केवल ह्रदय की चाह बनकर !
फ़र्ज़ निभाना है उस दूध का, जो रगों मैं बह रहा है खून बनकर !
जीवन की सच्चाई को समझुगा, स्वयं एक सच्चाई बनकर !
अपने हर कर्तव्य का पालन करूँ, कर्त्व्यनिष्ट बनकर !
भटके हुए को मार्ग दिखाऊ, सच्चा मार्गदर्शक बनकर !
हे ईश्वर ब्रम्हांड रचेता, रूप दिखा दे दयालु बनकर !
तन-मन मेरा विस्मय होगा, महकेगा गुलजार ये बनकर !!
आपका शिवा
२१/०१/२००६
Hey maa !!! Mothers day special
Dedicated to my MOM!!
हे माँ चरण चूमकर वंदना करूँ तुम्हारी,
मेरी हर सांस जो कि अमानत है तुम्हारी !
हर धड़कन तुझे समर्पित है- तू है प्राणों से प्यारी,
तेरे मातृत्व मैं जीवन गुजर जाये, यही चाहत है हमारी !!
आपका शिवा
हे माँ चरण चूमकर वंदना करूँ तुम्हारी,
मेरी हर सांस जो कि अमानत है तुम्हारी !
हर धड़कन तुझे समर्पित है- तू है प्राणों से प्यारी,
तेरे मातृत्व मैं जीवन गुजर जाये, यही चाहत है हमारी !!
आपका शिवा
Tuesday, March 23, 2010
On the winning occasion (SARPANCH)
Dedicated to my uncle (Omkar Singh Thakur):-
इरादों मैं जान और हौसले बुलंद हैं अगर ,
तेरी पहुच है आसमा - दिखा दे तू अपना हुनर !
जीत ले हर उस दिल को - जो है तुझसे बेखबर,
नेकी कर दामन थम सच्चाई का- नहीं ये मौका उम्र भर !!
आपका शिवा
फेब्रुअरी २०१०
इरादों मैं जान और हौसले बुलंद हैं अगर ,
तेरी पहुच है आसमा - दिखा दे तू अपना हुनर !
जीत ले हर उस दिल को - जो है तुझसे बेखबर,
नेकी कर दामन थम सच्चाई का- नहीं ये मौका उम्र भर !!
आपका शिवा
फेब्रुअरी २०१०
Uddesya
Dear Readers,
I am writing my thoughts which comes in a form of some special lines from heart. I hope you'll like this.
Truly urs,
SHIVA
I am writing my thoughts which comes in a form of some special lines from heart. I hope you'll like this.
Truly urs,
SHIVA
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